व्यापम ही व्यापक हैं!

 

-रवि रणवीरा

 

घोटालेबाजों ने क्या – क्या नहीं घोटा चारा, राशन, किराशन, कोयला और यहां तक 2जी नेटवर्क को भी नहीं छोड़ा. और छोङे भी क्यों भला पूरी उमर गुजारने के बाद तो कुर्सी मिलती तो फिर पूरा हिसाब – किताब तो करना ही पड़ता हैं. घोटाले तो भारत की राजनीतिक पहचान बन गए हैं बिलकुल आधार कार्ड की तरह.

 

आम आदमी एक अना चुरा ले तो लोग उसको भरी बाजार में पीट पीट कर धोबीपट्टा बना देते हैं लेकिन समाज – शासन सबके सामने यह नेता सबकुछ पचा कर घुमते फिरते हैं और कोई जानकार भी कुछ नहीं कर पाता है. घोटाला कोई घाटे का सौदा नहीं है क्योंकि गुनाह साबित होते होते तो घोटालेबाजों के पोते तो दादा बन कर बैठ जाते हैं तो फिर कौन सत्ताधारी नहीं करना चाहेगा घोटाले का सौदा. वैसे तो भारत में बहुत घोटाले हुए और शौचालय से लेकर सचिवालय तक घोटाले हो भी रहे हैं. लेकिन पिछले साल मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के ऊपर व्यापम घोटाले का मामला सामने आया.

 

व्यापम अब तक का सबसे बड़ा घोटाला है क्योंकि इसने मेडिकल के छात्रों के भविष्य के साथ सबसे बड़ा खिलवाड़ किया. इस व्यापम ने तो आने वाले बच्चों को भी वृहत रूप से डरा दिया है और जो इसके भुक्तभोगी है उनका तो खुद को जिंदा रखना किसी चमत्कार से कम नहीं है. क्या उच्च स्तरीय शिक्षण संस्थानों में भी ऐसा होता है, इस नजरिये से भी यह वृहत है. इस मामले में छानबीन कर रहे सैकड़ों अधिकारियों और खोजी पत्रकारों को जिस तरह मौत के घाट उतारा गया, तो यह भी वृहत है. इस तरह की निर्मम घटना व्यापम को अद्वितीय घोटाला बनाने में कामयाब हो गई. फिल्मकारों की भी कल्पना इसके आगे फेल हो गई लेकिन हो सकता है कि आने वाली फिल्म में व्यापम की झलक मिले. इस घोटाले की दूसरी वृहत बात यह कि जितनी जल्दी शिवराज सिंह चौहान को कोर्ट ने क्लीन चिट दिया, वैसा कभी हुआ नहीं किसी भी घोटाले में. काश! की इस घोटाले के दौरान हुए हत्याओं का भी पर्दाफाश हुआ होता तो न्याय की गरिमा और भी बढ़ जाती है.

 

खैर घोटाले तो होते रहेंगे और घोटाले तो घोटाले को जन्म देते हैं, यह सिलसिला पुराना है. लेकिन हो सकता है कि आने वाले दिनों में इससे भी बड़ा घोटाला हो. और यह भी हो सकता है कि एक दिन घोटाला का भी घोटाला हो. परंतु अब तक तो व्यापम ही व्यापक हैं.